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Infertility Meaning in Hindi | बांझपन का अर्थ, कारण, लक्षण और उपचार

Infertility Meaning in Hindi

Infertility का मतलब क्या होता है? (Infertility Meaning in Hindi)

Infertility की सरल परिभाषा

Infertility का मतलब है लंबे समय तक नियमित रूप से बिना किसी गर्भनिरोधक के संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण न होना। आमतौर पर डॉक्टर इसे तब Infertility मानते हैं जब एक साल तक प्रयास करने के बाद भी महिला गर्भवती नहीं हो पाती।

हालांकि, अगर महिला की उम्र 35 साल से अधिक हो, तो डॉक्टर लगभग 6 महीने तक प्रयास के बाद ही जांच कराने की सलाह देते हैं। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ गर्भधारण की संभावना धीरे-धीरे कम होने लगती है।

मेडिकल भाषा में Infertility क्या है

मेडिकल भाषा में Infertility को एक ऐसी स्थिति माना जाता है जिसमें पुरुष या महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसका मतलब यह है कि शरीर में गर्भधारण के लिए जरूरी प्रक्रियाओं में कहीं न कहीं समस्या आ रही है।

पुरुष और महिला Infertility में अंतर

पुरुष Infertility आमतौर पर शुक्राणुओं की संख्या कम होने, उनकी गुणवत्ता कमजोर होने या उनकी गति (Motility) कम होने के कारण होती है। इसके अलावा हार्मोनल समस्या, संक्रमण या कुछ जीवनशैली से जुड़े कारण भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

वहीं महिला Infertility अक्सर अंडोत्सर्जन की समस्या, फेलोपियन ट्यूब में रुकावट, हार्मोनल असंतुलन या गर्भाशय से जुड़ी किसी समस्या के कारण हो सकती है। कुछ महिलाओं में PCOS, एंडोमेट्रियोसिस या थायरॉयड जैसी समस्याएं भी गर्भधारण में बाधा बन सकती हैं।

Infertility कितने प्रकार की होती है?

Primary Infertility क्या है

Primary Infertility उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी दंपति को शादी के बाद लंबे समय तक कोशिश करने के बावजूद कभी भी गर्भधारण नहीं होता। यानी महिला पहले कभी गर्भवती नहीं हुई होती।

आमतौर पर अगर एक साल तक बिना किसी गर्भनिरोधक के नियमित संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण नहीं होता, तो डॉक्टर इसे Primary Infertility मानते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे हार्मोनल असंतुलन, अंडोत्सर्जन में समस्या, शुक्राणुओं की कमी या प्रजनन अंगों से जुड़ी कोई स्वास्थ्य समस्या।

Secondary Infertility क्या होती है

Secondary Infertility उस स्थिति को कहा जाता है जब दंपति को पहले कभी गर्भधारण हो चुका हो, लेकिन बाद में दोबारा गर्भधारण करने में समस्या आने लगे।

 

उदाहरण के लिए, अगर किसी महिला को पहले बच्चा हो चुका है लेकिन अब लंबे समय तक कोशिश करने के बाद भी दोबारा गर्भ नहीं ठहर रहा है, तो इसे Secondary Infertility कहा जाता है। इसके पीछे उम्र बढ़ना, हार्मोनल बदलाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

Male Infertility क्या है

जब गर्भधारण न होने का कारण पुरुष से जुड़ा होता है, तो उसे Male Infertility कहा जाता है। यह समस्या अक्सर शुक्राणुओं की संख्या कम होने, उनकी गुणवत्ता कमजोर होने या उनकी गति कम होने के कारण होती है।

Female Infertility क्या है

जब गर्भधारण में समस्या का कारण महिला के शरीर से जुड़ा होता है, तो उसे Female Infertility कहा जाता है। यह समस्या अक्सर अंडोत्सर्जन (Ovulation) में गड़बड़ी, फेलोपियन ट्यूब में रुकावट, गर्भाशय से जुड़ी समस्या या हार्मोनल असंतुलन के कारण हो सकती है।

Infertility के मुख्य कारण

महिलाओं में Infertility के कारण

महिलाओं में Infertility की समस्या कई शारीरिक और हार्मोनल कारणों से हो सकती है। प्रजनन प्रणाली से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी का असर गर्भधारण की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

  • हार्मोन असंतुलन: महिलाओं के शरीर में हार्मोन प्रजनन प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, तो अंडोत्सर्जन (Ovulation) ठीक से नहीं हो पाता। जब अंडा समय पर नहीं बनता या बाहर नहीं निकलता, तो गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है। थायरॉयड की समस्या या अन्य हार्मोनल बदलाव भी इस स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

 

  • PCOS समस्या: PCOS यानी Polycystic Ovary Syndrome महिलाओं में Infertility का एक सामान्य कारण माना जाता है। इस स्थिति में अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन सकते हैं, जिससे अंडोत्सर्जन नियमित रूप से नहीं हो पाता। PCOS के कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है। इसी वजह से कई महिलाओं को गर्भधारण करने में कठिनाई होती है।

 

  • फेलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज: फेलोपियन ट्यूब वह रास्ता होता है जिसके जरिए अंडा अंडाशय से गर्भाशय तक पहुंचता है। अगर इन ट्यूब्स में रुकावट आ जाए, तो शुक्राणु और अंडा आपस में मिल नहीं पाते। ऐसी स्थिति में गर्भधारण होना मुश्किल हो जाता है। फेलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज कभी-कभी संक्रमण, सर्जरी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकता है।

 

  • उम्र का बढ़ना: उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। खासकर 35 साल के बाद गर्भधारण की संभावना पहले की तुलना में कम हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उम्र के साथ अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता दोनों प्रभावित होने लगती हैं। इसी वजह से कई डॉक्टर समय पर परिवार की योजना बनाने की सलाह देते हैं।

पुरुषों में Infertility के कारण

अक्सर यह माना जाता है कि गर्भधारण न होने की समस्या केवल महिलाओं से जुड़ी होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। कई मामलों में Infertility का कारण पुरुषों से भी जुड़ा होता है।

  • कम स्पर्म काउंट: कम स्पर्म काउंट यानी शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम होना पुरुष Infertility का एक आम कारण है। जब वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होती है, तो अंडाणु तक पहुंचकर उसे निषेचित करने की संभावना भी कम हो जाती है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है, जैसे हार्मोनल असंतुलन, कुछ संक्रमण, दवाइयों का असर या गलत जीवनशैली।

 

  • स्पर्म की कमजोर गुणवत्ता: कई बार शुक्राणुओं की संख्या तो सामान्य होती है, लेकिन उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं होती। इसका मतलब है कि शुक्राणु कमजोर होते हैं या उनकी गति सही नहीं होती। ऐसी स्थिति में शुक्राणु अंडाणु तक पहुंच नहीं पाते या उसे सही तरीके से निषेचित नहीं कर पाते, जिससे गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है।

 

  • हार्मोनल समस्याएं: पुरुषों के शरीर में भी कुछ हार्मोन ऐसे होते हैं जो शुक्राणुओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर इन हार्मोनों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हार्मोनल असंतुलन के कारण स्पर्म काउंट कम हो सकता है या उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।

 

  • धूम्रपान और शराब: धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इन आदतों के कारण शुक्राणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा लंबे समय तक इनका सेवन करने से हार्मोनल संतुलन भी बिगड़ सकता है, जिससे Infertility की समस्या बढ़ सकती है।

लाइफस्टाइल से जुड़े कारण

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी जीवनशैली भी कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही है। Infertility की समस्या में भी लाइफस्टाइल का बड़ा असर देखा जाता है।

  • गलत खान-पान: आजकल कई लोग संतुलित और पौष्टिक आहार लेने की बजाय जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाने लगे हैं। ऐसे भोजन में जरूरी पोषक तत्व कम होते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। लंबे समय तक ऐसा खान-पान रहने से शरीर की सेहत पर असर पड़ता है और यह प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।

 

  • तनाव: लगातार तनाव में रहना भी Infertility की समस्या से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। ज्यादा मानसिक दबाव और चिंता होने से शरीर के हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। जब हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका असर प्रजनन क्षमता पर भी पड़ सकता है। इसलिए मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है।

 

  • मोटापा: मोटापा भी कई स्वास्थ्य समस्याओं की तरह Infertility के जोखिम को बढ़ा सकता है। ज्यादा वजन होने से शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं, जो प्रजनन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि से वजन को नियंत्रित रखना जरूरी माना जाता है।

 

  • नींद की कमी: आजकल कई लोग काम के दबाव या अनियमित दिनचर्या के कारण पर्याप्त नींद नहीं ले पाते। लेकिन नींद की कमी का असर शरीर की कई प्रक्रियाओं पर पड़ता है। जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो हार्मोन का संतुलन भी प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक नींद की कमी रहने से यह समस्या प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है।
क्या आप Infertility की समस्या से जूझ रहे हैं? आज ही हमारे विशेषज्ञों से सलाह लें और सही इलाज की शुरुआत करें।

Infertility के लक्षण क्या होते हैं?

Infertility का सबसे प्रमुख संकेत यह होता है कि लंबे समय तक कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पाता। हालांकि कई बार इसके अलावा भी कुछ ऐसे संकेत दिखाई देते हैं जो प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

महिलाओं में दिखने वाले लक्षण

महिलाओं में Infertility से जुड़े कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं, जो प्रजनन प्रणाली में किसी समस्या की ओर इशारा करते हैं।

सबसे आम लक्षणों में पीरियड्स का अनियमित होना शामिल है। अगर मासिक धर्म बहुत देर से आए, बहुत जल्दी आए या कई महीनों तक न आए, तो यह हार्मोनल असंतुलन या अंडोत्सर्जन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा दर्द या असामान्य ब्लीडिंग भी होती है। इसके अलावा चेहरे या शरीर पर अचानक ज्यादा बाल आना, वजन का तेजी से बढ़ना या PCOS से जुड़े अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

पुरुषों में दिखने वाले लक्षण

पुरुषों में Infertility के लक्षण अक्सर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। कई बार यह समस्या बिना किसी खास संकेत के भी हो सकती है।

फिर भी कुछ मामलों में यौन इच्छा में कमी, इरेक्शन से जुड़ी समस्या या हार्मोनल बदलाव से जुड़े संकेत दिखाई दे सकते हैं। कुछ पुरुषों में अंडकोष के आसपास दर्द, सूजन या असामान्य बदलाव भी महसूस हो सकते हैं।

हालांकि इन लक्षणों का होना हमेशा Infertility का ही संकेत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी होता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए

अगर एक साल तक नियमित रूप से कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

इसके अलावा अगर महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा है, तो लगभग 6 महीने तक प्रयास के बाद ही डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होता है।

अगर पीरियड्स अनियमित हों, लंबे समय से कोई स्वास्थ्य समस्या हो या पहले कभी गर्भधारण में दिक्कत आई हो, तो भी समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना सही रहता है। इससे समस्या का कारण जल्दी पता चल सकता है और सही इलाज शुरू किया जा सकता है।

Infertility की जांच कैसे की जाती है?

आमतौर पर Infertility की जांच पुरुष और महिला दोनों की की जाती है, क्योंकि कई मामलों में समस्या किसी एक या दोनों में हो सकती है। सही जांच से डॉक्टर को कारण समझने में मदद मिलती है और उसी के आधार पर इलाज तय किया जाता है।

महिलाओं की जांच

महिलाओं में Infertility के कारणों को समझने के लिए डॉक्टर कुछ खास टेस्ट करवाते हैं। इन जांचों से प्रजनन अंगों की स्थिति और हार्मोन के स्तर के बारे में जानकारी मिलती है।

 

  • अल्ट्रासाउंड: 

अल्ट्रासाउंड एक सामान्य जांच है, जिसमें गर्भाशय और अंडाशय की स्थिति को देखा जाता है। इस जांच से यह पता चलता है कि अंडाशय में अंडे बन रहे हैं या नहीं और कहीं कोई सिस्ट या अन्य समस्या तो नहीं है। अल्ट्रासाउंड की मदद से डॉक्टर PCOS, फाइब्रॉइड या अन्य प्रजनन संबंधी समस्याओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

  • हार्मोन टेस्ट

हार्मोन टेस्ट के जरिए शरीर में मौजूद विभिन्न हार्मोन के स्तर की जांच की जाती है। ये हार्मोन अंडोत्सर्जन और प्रजनन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर किसी हार्मोन का स्तर असंतुलित होता है, तो इससे गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है। इसलिए डॉक्टर अक्सर यह जांच कराने की सलाह देते हैं।

 

  • HSG टेस्ट

HSG यानी Hysterosalpingography एक विशेष जांच होती है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि फेलोपियन ट्यूब खुली हैं या उनमें कहीं रुकावट तो नहीं है। इस जांच में एक विशेष डाई का उपयोग किया जाता है, जिसकी मदद से एक्स-रे के जरिए ट्यूब्स की स्थिति देखी जाती है। अगर ट्यूब में ब्लॉकेज होता है, तो वह इस जांच में दिखाई दे सकता है।

पुरुषों की जांच

पुरुषों में Infertility का कारण जानने के लिए भी कुछ जरूरी जांच की जाती हैं। इन जांचों से शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गुणवत्ता और हार्मोन से जुड़ी जानकारी मिलती है।

 

  • सीमन एनालिसिस

सीमन एनालिसिस पुरुषों की एक सामान्य और महत्वपूर्ण जांच होती है। इसमें वीर्य के नमूने की जांच करके यह देखा जाता है कि शुक्राणुओं की संख्या कितनी है, उनकी गति कैसी है और उनकी गुणवत्ता कैसी है। इस जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि शुक्राणु गर्भधारण की प्रक्रिया में सही तरीके से काम कर सकते हैं या नहीं।

 

  • हार्मोन टेस्ट

कुछ मामलों में पुरुषों के लिए भी हार्मोन टेस्ट कराया जाता है। इस जांच से यह पता चलता है कि शरीर में वे हार्मोन सही स्तर पर हैं या नहीं जो शुक्राणुओं के निर्माण में भूमिका निभाते हैं। अगर हार्मोनल असंतुलन पाया जाता है, तो डॉक्टर उसी के अनुसार आगे का इलाज तय कर सकते हैं।

Infertility का इलाज कैसे किया जाता है?

दवाओं से इलाज

कई बार Infertility की समस्या हार्मोनल असंतुलन या अंडोत्सर्जन की गड़बड़ी के कारण होती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर कुछ दवाएं देते हैं, जो हार्मोन को संतुलित करने और अंडोत्सर्जन को नियमित करने में मदद करती हैं।

 

पुरुषों में भी अगर हार्मोनल समस्या या पोषण की कमी हो, तो डॉक्टर दवाएं या सप्लीमेंट्स की सलाह दे सकते हैं। कई बार केवल सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव से भी गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है।

IUI ट्रीटमेंट

IUI यानी Intrauterine Insemination एक सामान्य प्रजनन तकनीक है। इस प्रक्रिया में पुरुष के शुक्राणुओं को विशेष तरीके से तैयार करके सीधे महिला के गर्भाशय में डाला जाता है।

 

इसका उद्देश्य यह होता है कि शुक्राणु अंडाणु तक आसानी से पहुंच सकें और निषेचन की संभावना बढ़ जाए। IUI आमतौर पर तब किया जाता है जब समस्या हल्की हो और अन्य तरीके प्रभावी न हों।

IVF ट्रीटमेंट

IVF यानी In Vitro Fertilization एक उन्नत प्रजनन तकनीक है। इसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में मिलाया जाता है।

 

जब निषेचन हो जाता है और भ्रूण बन जाता है, तो उसे महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है। IVF उन मामलों में मददगार हो सकता है जहां अन्य उपचार सफल नहीं होते।

सर्जरी के विकल्प

कुछ मामलों में Infertility का कारण शारीरिक समस्या हो सकती है, जैसे फेलोपियन ट्यूब में रुकावट, गर्भाशय में फाइब्रॉइड या पुरुषों में किसी तरह की संरचनात्मक समस्या।

 

ऐसी स्थिति में डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी के जरिए समस्या को ठीक करने के बाद गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए सही कारण पता लगाना और उसी के अनुसार इलाज करवाना बहुत जरूरी होता है।

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निष्कर्ष

Infertility को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह एक ऐसी स्थिति है जो आजकल कई दंपतियों में देखने को मिल रही है। इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, लेकिन सही जानकारी और समय पर जांच से इस समस्या को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। अक्सर लोग लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करते रहते हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है। यदि समय रहते डॉक्टर से सलाह ली जाए, तो कारण का पता लगाकर सही उपचार शुरू किया जा सकता है।

सही समय पर इलाज का बहुत महत्व होता है, क्योंकि आज चिकित क्षेत्र में कई आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं जो गर्भधारण की संभावना को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसलिए यदि लंबे समय तक गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो घबराने की बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे सही निर्णय होता है, जिससे उचित मार्गदर्शन और प्रभावी इलाज मिल सके।

Infertility से जुड़े सामान्य सवाल

1. क्या Infertility केवल महिलाओं में होती है?

नहीं, Infertility केवल महिलाओं से जुड़ी समस्या नहीं है। कई मामलों में इसका कारण पुरुषों में भी पाया जाता है।

आज के समय में Infertility के कई इलाज उपलब्ध हैं। समस्या के कारण के अनुसार डॉक्टर दवाएं, IUI, IVF या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।

हां, उम्र बढ़ने के साथ प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है। खासकर महिलाओं में 35 साल के बाद गर्भधारण की संभावना पहले की तुलना में कम होने लगती है।

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