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MESA Meaning in Hindi: मेसा क्या होता है?

surrogacy types

मेसा की परिभाषा

MESA एक सुनियोजित सर्जिकल प्रक्रिया है जिसे प्रशिक्षित विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है। यह आमतौर पर दर्द रहित होती है क्योंकि इसे एनेस्थीसिया के तहत किया जाता है। हालांकि, कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने प्रजनन विशेषज्ञ से परामर्श करना बहुत महत्वपूर्ण है।

मेसा का पूरा नाम क्या है?

MESA (माइक्रोसर्जिकल एपिडिडायमल स्पर्म एस्पिरेशन) एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है जो एपिडिडायमिस से शुक्राणु निकालने में सहायक होती है। एपिडिडायमिस एक कुंडलित नली होती है जहाँ शुक्राणु संग्रहित होते हैं। यह प्रक्रिया पुरुष बांझपन से पीड़ित लोगों के लिए मददगार साबित होती है। MESA एक ऐसी तकनीक है जिसने कई पुरुषों को जैविक पिता बनने में मदद की है। हालांकि, इस तकनीक के बारे में पूरी जानकारी होना और सबसे उपयुक्त तकनीक का चुनाव करना बेहद महत्वपूर्ण है।

मेसा का हिंदी अर्थ

MESA (माइक्रोसर्जिकल एपिडिडायमल स्पर्म एस्पिरेशन) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग एपिडिडायमिस से सीधे शुक्राणु एकत्र करने के लिए किया जाता है। एपिडिडायमिस अंडकोष के पीछे स्थित एक छोटी नली होती है जहाँ शुक्राणु संग्रहित होते हैं। यह प्रक्रिया सही और सुरक्षित तरीके से हो, यह सुनिश्चित करने के लिए माइक्रोस्कोप की सहायता से की जाती है।

मेसा किस मेडिकल प्रक्रिया से संबंधित है?

यह एक मेडिकल सर्जिकल प्रक्रिया है, जो मुख्यतः पुरुष बांझपन (Male Infertility) के इलाज से संबंधित होती है।

मेसा प्रक्रिया क्या होती है?

मेसा प्रक्रिया का उद्देश्य

मेसा प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पुरुष बांझपन की एक विशेष समस्या का समाधान करना है, जिसमें पुरुष के शरीर में शुक्राणु बनते तो हैं, लेकिन वे प्राकृतिक रूप से वीर्य में नहीं पहुँच पाते।

पुरुष प्रजनन में मेसा की भूमिका

  • MESA प्रक्रिया एपिडिडिमिस से सीधे शुक्राणु निकालने में मदद करती है, जिससे उन पुरुषों में भी शुक्राणु उपलब्ध हो जाते हैं, जिनके वीर्य में एक भी शुक्राणु नहीं पाया जाता।
  • जिन दंपतियों के लिए प्राकृतिक गर्भधारण संभव नहीं होता, उनके लिए MESA जैविक माता-पिता बनने का अवसर प्रदान करती है।

मेसा और पुरुष बांझपन का संबंध

पुरुष बांझपन के कुछ मामलों में, शुक्राणु उत्पन्न तो होते हैं लेकिन प्रजनन पथ में रुकावट या अवरोध के कारण प्राकृतिक रूप से स्खलित नहीं हो पाते। MESA व्यवहार्य शुक्राणुओं को निकालकर सहायक प्रजनन तकनीकों में उपयोग करने का समाधान प्रदान करता है।

मेसा प्रक्रिया किन लोगों के लिए की जाती है?

ऑब्स्ट्रक्टिव एजूस्पर्मिया के मामले

वीर्यपात की समस्या (एस्पर्मिया), वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या शून्य होना (एज़ोस्पर्मिया), शुक्राणुओं की कम संख्या/ओलिगोस्पर्मिया, वीर्य में शुक्राणुओं की कम संख्या, शुक्राणुओं की कम संख्या बांझपन का कारण बन सकती है।

सर्जरी या जन्मजात कारणों से शुक्राणु अवरोध

यदि वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या अधिक होने से कोई लाभ नहीं होता है, तो शुक्राणुओं की गति और प्रवाह अच्छा होना चाहिए। तभी शुक्राणु और अंडाणु का निषेचन हो सकता है। जब वीर्य की मात्रा, शुक्राणुओं की संख्या और संरचना सामान्य हो, लेकिन सभी शुक्राणु गतिहीन (एस्थेनोजोस्पर्मिया) हों, यानी एक ही स्थान पर कंपन करते हों, तो ऐसे शुक्राणु मादा अंडाणु तक नहीं पहुंच पाते। इससे बांझपन की समस्या उत्पन्न होती है। इसे ‘इमोटाइल सिलिया सिंड्रोम’ कहते हैं।

आईवीएफ की आवश्यकता वाले मरीज

जहाँ IVF या विशेष रूप से ICSI के लिए सीमित संख्या में शुक्राणुओं की आवश्यकता होती है और उन्हें शल्य प्रक्रिया द्वारा प्राप्त करना जरूरी होता है। 

MESA प्रक्रिया से जुड़ी सही जानकारी चाहिए? हमारे फर्टिलिटी विशेषज्ञों से बात करें और आज ही स्पष्ट मार्गदर्शन पाएं।

Success Rate of IVF

IVF generally has higher success rates than IUI.

On average:

  • 40–60% success per cycle (age-dependent)
  • Higher success with good embryo quality

मेसा प्रक्रिया कैसे की जाती है?

मेसा प्रक्रिया का उद्देश्य

मेसा प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पुरुष बांझपन की एक विशेष समस्या का समाधान करना है, जिसमें पुरुष के शरीर में शुक्राणु बनते तो हैं, लेकिन वे प्राकृतिक रूप से वीर्य में नहीं पहुँच पाते।

पुरुष प्रजनन में मेसा की भूमिका

  • MESA प्रक्रिया एपिडिडिमिस से सीधे शुक्राणु निकालने में मदद करती है, जिससे उन पुरुषों में भी शुक्राणु उपलब्ध हो जाते हैं, जिनके वीर्य में एक भी शुक्राणु नहीं पाया जाता।
  • जिन दंपतियों के लिए प्राकृतिक गर्भधारण संभव नहीं होता, उनके लिए MESA जैविक माता-पिता बनने का अवसर प्रदान करती है।

मेसा और पुरुष बांझपन का संबंध

पुरुष बांझपन के कुछ मामलों में, शुक्राणु उत्पन्न तो होते हैं लेकिन प्रजनन पथ में रुकावट या अवरोध के कारण प्राकृतिक रूप से स्खलित नहीं हो पाते। MESA व्यवहार्य शुक्राणुओं को निकालकर सहायक प्रजनन तकनीकों में उपयोग करने का समाधान प्रदान करता है।

मेसा प्रक्रिया किन लोगों के लिए की जाती है?

ऑब्स्ट्रक्टिव एजूस्पर्मिया के मामले

वीर्यपात की समस्या (एस्पर्मिया), वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या शून्य होना (एज़ोस्पर्मिया), शुक्राणुओं की कम संख्या/ओलिगोस्पर्मिया, वीर्य में शुक्राणुओं की कम संख्या, शुक्राणुओं की कम संख्या बांझपन का कारण बन सकती है।

सर्जरी या जन्मजात कारणों से शुक्राणु अवरोध

यदि वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या अधिक होने से कोई लाभ नहीं होता है, तो शुक्राणुओं की गति और प्रवाह अच्छा होना चाहिए। तभी शुक्राणु और अंडाणु का निषेचन हो सकता है। जब वीर्य की मात्रा, शुक्राणुओं की संख्या और संरचना सामान्य हो, लेकिन सभी शुक्राणु गतिहीन (एस्थेनोजोस्पर्मिया) हों, यानी एक ही स्थान पर कंपन करते हों, तो ऐसे शुक्राणु मादा अंडाणु तक नहीं पहुंच पाते। इससे बांझपन की समस्या उत्पन्न होती है। इसे ‘इमोटाइल सिलिया सिंड्रोम’ कहते हैं।

सर्जरी या जन्मजात कारणों से शुक्राणु अवरोध

यदि वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या अधिक होने से कोई लाभ नहीं होता है, तो शुक्राणुओं की गति और प्रवाह अच्छा होना चाहिए। तभी शुक्राणु और अंडाणु का निषेचन हो सकता है। जब वीर्य की मात्रा, शुक्राणुओं की संख्या और संरचना सामान्य हो, लेकिन सभी शुक्राणु गतिहीन (एस्थेनोजोस्पर्मिया) हों, यानी एक ही स्थान पर कंपन करते हों, तो ऐसे शुक्राणु मादा अंडाणु तक नहीं पहुंच पाते। इससे बांझपन की समस्या उत्पन्न होती है। इसे ‘इमोटाइल सिलिया सिंड्रोम’ कहते हैं।

आईवीएफ की आवश्यकता वाले मरीज

जहाँ IVF या विशेष रूप से ICSI के लिए सीमित संख्या में शुक्राणुओं की आवश्यकता होती है और उन्हें शल्य प्रक्रिया द्वारा प्राप्त करना जरूरी होता है। 

मेसा प्रक्रिया कैसे की जाती है?

सर्जिकल प्रक्रिया की चरणबद्ध जानकारी

MESA को माइक्रो सर्जिकल तकनीकों का उपयोग करके किया जाता है, जिससे ऊतकों को होने वाली क्षति कम से कम होती है और तेजी से रिकवरी को बढ़ावा मिलता है।

एनेस्थीसिया और प्रक्रिया का समय

MESA प्रक्रिया आमतौर पर स्थानीय बेहोशी के तहत की जाती है, जिससे प्रक्रिया के दौरान रोगी को आराम मिलता है।

शुक्राणु निकालने की तकनीक

  • उच्च शक्ति वाले माइक्रोस्कोप और सटीक उपकरणों का उपयोग करते हुए, सर्जन एपिडिडाइमिस तक पहुंचने के लिए अंडकोष में एक छोटा चीरा लगाता है।
  • सर्जन सावधानीपूर्वक एपिडिडायमल नलिकाओं के उस भाग की पहचान करता है और उसे अलग करता है जिसमें शुक्राणु होते हैं। फिर इन शुक्राणुओं को एक महीन सुई या पिपेट की सहायता से निकाला जाता है।

मेसा प्रक्रिया के फायदे

उच्च गुणवत्ता वाले शुक्राणु प्राप्त होना

MESA प्रक्रिया में एपिडिडिमिस से सीधे शुक्राणु निकाले जाते हैं। यह स्थान वह होता है जहाँ शुक्राणु पूरी तरह परिपक्व होते हैं। माइक्रोस्कोप की सहायता से डॉक्टर बेहतर गतिशीलता (motility) और संरचना वाले शुक्राणुओं का चयन कर पाते हैं, जिससे निषेचन की संभावना बढ़ जाती है।

आईवीएफ और आईसीएसआई में उपयोग

MESA से प्राप्त शुक्राणुओं का उपयोग IVF (In Vitro Fertilization) और विशेष रूप से ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) में किया जाता है। ICSI में एक ही स्वस्थ शुक्राणु की आवश्यकता होती है, इसलिए MESA उन मरीजों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होती है, जिनमें वीर्य के माध्यम से शुक्राणु उपलब्ध नहीं हो पाते।

लंबे समय तक उपयोग की संभावना

MESA द्वारा प्राप्त अतिरिक्त शुक्राणुओं को फ्रीज़ करके लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे भविष्य में दोबारा सर्जरी की आवश्यकता कम हो जाती है और दंपति को अगली IVF कोशिशों के लिए दोबारा प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ता।

मेसा प्रक्रिया से जुड़े जोखिम और सावधानियां

संभावित साइड इफेक्ट

  • अंडकोष या आसपास के हिस्से में हल्की सूजन या दर्द
  • थोड़े समय के लिए असहजता या भारीपन महसूस होना
  • दुर्लभ मामलों में संक्रमण या रक्तस्राव

प्रक्रिया के बाद देखभाल

  • डॉक्टर द्वारा बताए गए आराम की अवधि का पालन करना
  • कुछ समय तक भारी शारीरिक मेहनत और व्यायाम से बचना
  • निर्धारित दवाइयाँ और पेन किलर समय पर लेना
  • सूजन या असामान्य दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना

डॉक्टर की सलाह क्यों जरूरी है

  • MESA सभी पुरुषों के लिए उपयुक्त नहीं होती
  • सही जांच के बाद ही यह तय किया जाता है कि MESA आवश्यक है या नहीं
  • अनुभवी यूरोलॉजिस्ट या फर्टिलिटी विशेषज्ञ द्वारा की गई प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और प्रभावी होती है

मेसा और अन्य शुक्राणु संग्रह तकनीकों में अंतर

जब पुरुषों के वीर्य में रुकावट या किसी अन्य समस्या के कारण शुक्राणु नहीं होते हैं, तो डॉक्टर विशेष विधियों का उपयोग करके सीधे शरीर से शुक्राणु निकालते हैं। इस उद्देश्य के लिए MESA, PESA और TESA तीन सामान्य तकनीकें हैं जिनका उपयोग किया जाता है। 

मेसा बनाम टेसा

  • इस प्रक्रिया में अंडकोष से सीधे शुक्राणु एकत्र करने के लिए सुई का उपयोग किया जाता है।
  • इसका उपयोग अक्सर तब किया जाता है जब एपिडिडाइमिस में शुक्राणु मौजूद नहीं होते हैं।
  • यह प्रक्रिया आईवीएफ के साथ ही उसी दिन की जा सकती है।
  • TESA गैर-अवरोधक एज़ोस्पर्मिया वाले पुरुषों के लिए उपयोगी है।

मेसा बनाम पेसा

  • इस प्रक्रिया में, बिना सर्जरी के एपिडिडाइमिस से शुक्राणु निकालने के लिए सुई का उपयोग किया जाता है।
  • यह एक त्वरित और सरल प्रक्रिया है जो स्थानीय बेहोशी की दवा के तहत की जाती है।
  • PESA प्रक्रिया से MESA की तुलना में कम शुक्राणु प्राप्त होते हैं।
  • यदि पर्याप्त शुक्राणु नहीं मिलते हैं तो इस प्रक्रिया को दोहराने की आवश्यकता हो सकती है।

सही प्रक्रिया का चयन कैसे करें

पुरुष बांझपन के इलाज में सही मेडिकल प्रक्रिया का चयन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी एक उपचार को सभी के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता। MESA जैसी प्रक्रिया का चुनाव सोच-समझकर और विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।

मेसा के बाद गर्भधारण की संभावना

आईवीएफ और आईसीएसआई की भूमिका

  • ICSI में एक ही स्वस्थ शुक्राणु को अंडाणु के भीतर इंजेक्ट किया जाता है, जिससे निषेचन की संभावना बढ़ जाती है।
  • जिन मामलों में शुक्राणु की संख्या बहुत कम होती है, वहाँ ICSI सबसे प्रभावी तकनीक मानी जाती है।

इस तरह MESA और ICSI का संयोजन पुरुष बांझपन से जुड़े कई मामलों में गर्भधारण को संभव बनाता है।

सफलता दर को प्रभावित करने वाले कारक

  • शुक्राणुओं की गुणवत्ता: गतिशीलता और संरचना जितनी बेहतर होगी, निषेचन की संभावना उतनी अधिक होगी।
  • महिला साथी की उम्र और अंडाणु की गुणवत्ता: यह IVF/ICSI की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाती है।
  • बांझपन का मूल कारण: केवल रुकावट से जुड़ी समस्या होने पर परिणाम आमतौर पर बेहतर होते हैं।
  • डॉक्टर और लैब की विशेषज्ञता: अनुभवी टीम और उन्नत लैब तकनीक सफलता दर को बढ़ाती है।
  • भ्रूण की गुणवत्ता और गर्भाशय की स्थिति: स्वस्थ भ्रूण का प्रत्यारोपण गर्भधारण की संभावना को मजबूत करता है।

मेसा प्रक्रिया की लागत

भारत में मेसा की अनुमानित लागत

भारत में MESA प्रक्रिया की लागत अस्पताल, डॉक्टर की विशेषज्ञता और स्थान के आधार पर ₹80,000 से ₹1,50,000 तक हो सकती है।

लागत को प्रभावित करने वाले कारक

  • अनुभवी यूरोलॉजिस्ट या फर्टिलिटी विशेषज्ञ द्वारा की गई प्रक्रिया की लागत अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है, लेकिन इससे सफलता और सुरक्षा दोनों बढ़ती हैं।
  • यदि भविष्य के लिए शुक्राणुओं को फ्रीज़ किया जाता है, तो उसका अलग से खर्च जुड़ता है। लंबे समय तक स्टोरेज की अवधि भी लागत बढ़ा सकती है।

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निष्कर्ष

MESA प्रक्रिया पुरुष बांझपन के उन मामलों में एक प्रभावी समाधान प्रदान करती है, जहाँ शुक्राणु का निर्माण तो होता है लेकिन वे प्राकृतिक रूप से वीर्य में शामिल नहीं हो पाते। हालाँकि, MESA सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती। सही मरीज का चयन, विस्तृत मेडिकल जाँच और अनुभवी डॉक्टर की सलाह इस प्रक्रिया की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुल मिलाकर, सही मार्गदर्शन और उचित योजना के साथ MESA प्रक्रिया उन दंपतियों के लिए उम्मीद की नई राह खोल सकती है, जो लंबे समय से संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

FAQs

क्या मेसा प्रक्रिया दर्दनाक या जोखिम भरी है?

MESA प्रक्रिया एनेस्थीसिया के तहत की जाती है, इसलिए प्रक्रिया के दौरान आपको दर्द महसूस नहीं होगा। 

ऐसे पुरुष जिन्हें ऑब्स्ट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया, वैसक्टोमी या जन्मजात वास डेफरेंस की अनुपस्थिति हो।

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