Surrogate Mother Meaning in Hindi | सरोगेट माँ क्या होती है?

Blog Surrogate Mother Meaning in Hindi – पूरी जानकारी Surrogate Mother यानी सरोगेट मदर का विषय आज के समय में काफी चर्चा में है, खासकर उन दंपतियों के लिए जो किसी कारणवश प्राकृतिक तरीके से माता-पिता नहीं बन पाते। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक महिला किसी अन्य दंपति के लिए गर्भ धारण करती है और बच्चे को जन्म देती है। आधुनिक मेडिकल तकनीक और जागरूकता के कारण अब यह विकल्प पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित हो गया है। इस लेख में हम Surrogate Mother से जुड़ी हर जरूरी जानकारी आसान और स्पष्ट भाषा में समझेंगे, ताकि आपको इस विषय की पूरी समझ मिल सके। Surrogate Mother क्या होती है? IUI एक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है जिसमें तैयार किए गए स्वस्थ शुक्राणुओं को सीधे महिला के गर्भाशय में डाला जाता है, ताकि निषेचन (fertilization) की संभावना बढ़ सके। यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल, कम खर्चीली और कम समय लेने वाली होती है, इसलिए इसे शुरुआती उपचार के रूप में सुझाया जाता है। सरल परिभाषा Surrogate Mother वह महिला होती है जो किसी दूसरे दंपति के लिए गर्भ धारण करती है और बच्चे को जन्म देती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर तब अपनाई जाती है जब महिला खुद गर्भ धारण करने में असमर्थ होती है या गर्भावस्था उसके लिए जोखिम भरी हो सकती है। आसान भाषा में समझ अगर आसान शब्दों में समझें, तो Surrogate Mother एक ऐसी महिला होती है जो किसी और के बच्चे को अपने गर्भ में रखकर उसे जन्म देती है। बच्चा जन्म के बाद उस दंपति को सौंप दिया जाता है, जिनके लिए यह प्रक्रिया की गई होती है। यह एक जिम्मेदारी भरा और भावनात्मक रूप से संवेदनशील निर्णय होता है। Surrogacy से जुड़ी सही जानकारी और पर्सनलाइज्ड गाइडेंस के लिए आज ही Lifeline IVF Hospital से संपर्क करें और अपने पेरेंटहुड सफर की शुरुआत करें। Book An Appointment Surrogate Mother का हिंदी में मतलब “किराए की कोख” का अर्थ Surrogate Mother को हिंदी में अक्सर “किराए की कोख” कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि एक महिला अपनी कोख का उपयोग किसी अन्य दंपति के बच्चे को जन्म देने के लिए करती है। हालांकि यह शब्द थोड़ा साधारण है, लेकिन पूरी प्रक्रिया इससे कहीं ज्यादा संवेदनशील और कानूनी रूप से नियंत्रित होती है। सामान्य समझ आम तौर पर लोग इसे सिर्फ पैसे से जोड़कर देखते हैं, लेकिन असल में Surrogacy सिर्फ आर्थिक लेन-देन नहीं है। इसमें भावनात्मक, सामाजिक और कानूनी पहलू भी जुड़े होते हैं। कई मामलों में महिलाएं दूसरों की मदद करने के लिए भी सरोगेट मदर बनती हैं, खासकर जब यह प्रक्रिया altruistic (निःस्वार्थ) होती है। Surrogacy क्या है? Surrogacy की परिभाषा Surrogacy एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें एक महिला किसी अन्य व्यक्ति या दंपति के लिए गर्भ धारण करती है और बच्चे को जन्म देती है। यह प्रक्रिया IVF (In Vitro Fertilization) तकनीक के माध्यम से की जाती है। यह कैसे काम करती है इस प्रक्रिया में इच्छुक माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु को लैब में मिलाकर भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है। फिर इस भ्रूण को Surrogate Mother के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। अगर सब कुछ सही रहता है, तो गर्भावस्था सामान्य तरीके से आगे बढ़ती है और बच्चा जन्म लेता है। जन्म के बाद बच्चे की देखभाल और अधिकार इच्छुक माता-पिता के पास होते हैं। Surrogacy के प्रकार Traditional vs Gestational Surrogacy Surrogacy मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – Traditional Surrogacy और Gestational Surrogacy। Traditional Surrogacy में Surrogate Mother का अंडाणु इस्तेमाल होता है, जिससे वह बच्चे की जैविक मां भी होती है। जबकि Gestational Surrogacy में Surrogate Mother का बच्चे से कोई जैविक संबंध नहीं होता, क्योंकि भ्रूण इच्छुक माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु से तैयार किया जाता है। मुख्य अंतर दोनों प्रकारों में सबसे बड़ा अंतर यही है कि Traditional Surrogacy में सरोगेट मदर बच्चे से genetically जुड़ी होती है, जबकि Gestational Surrogacy में वह सिर्फ गर्भ धारण करती है। आज के समय में ज्यादातर मामलों में Gestational Surrogacy को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह कानूनी और भावनात्मक रूप से ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। Surrogate Mother बनने की प्रक्रिया मेडिकल प्रक्रिया Surrogate Mother बनने के लिए सबसे पहले महिला की पूरी मेडिकल जांच की जाती है, जिसमें उसकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की जांच शामिल होती है। इसके बाद IVF प्रक्रिया के जरिए भ्रूण तैयार किया जाता है और उसे Surrogate Mother के गर्भ में ट्रांसफर किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और डॉक्टर की निगरानी बेहद जरूरी होती है ताकि मां और बच्चे दोनों सुरक्षित रहें। कानूनी आवश्यकताएं Surrogacy एक संवेदनशील प्रक्रिया है, इसलिए इसमें कानूनी नियमों का पालन करना जरूरी होता है। Surrogate Mother और इच्छुक माता-पिता के बीच एक कानूनी समझौता (Agreement) किया जाता है, जिसमें सभी शर्तें स्पष्ट होती हैं। इसमें जिम्मेदारियां, खर्च, और बच्चे के अधिकारों से जुड़ी सभी बातें शामिल होती हैं। भारत में Surrogacy के नियम कानूनी स्थिति भारत में Surrogacy को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। Surrogacy (Regulation) Act के तहत केवल altruistic surrogacy की अनुमति है, यानी इसमें व्यावसायिक लाभ (commercial surrogacy) की अनुमति नहीं है। इसका उद्देश्य महिलाओं के शोषण को रोकना और प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना है। कौन पात्र है भारत में Surrogacy के लिए वही दंपति पात्र होते हैं जो मेडिकल कारणों से संतान प्राप्त नहीं कर सकते। इसके अलावा Surrogate Mother के लिए भी कुछ शर्तें होती हैं, जैसे उसकी उम्र, स्वास्थ्य और पारिवारिक स्थिति। आमतौर पर Surrogate Mother वही महिला हो सकती है जो पहले से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे चुकी हो। Surrogacy के फायदे और नुकसान फायदे Surrogacy उन दंपतियों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो लंबे समय से माता-पिता बनने का सपना देख रहे होते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें जैविक रूप से अपना बच्चा पाने का मौका देती है। इसके अलावा यह उन महिलाओं के लिए भी एक अवसर हो सकता है जो किसी की मदद करना चाहती हैं। सही मेडिकल देखरेख और कानूनी सुरक्षा के साथ यह एक सुरक्षित और सफल विकल्प बन सकता है। जोखिम और चुनौतियां हालांकि Surrogacy के कई फायदे हैं, लेकिन इसमें कुछ जोखिम और चुनौतियां भी शामिल हैं। गर्भावस्था
IUI Process in Hindi: प्रक्रिया, फायदे, सफलता और सावधानियां

Blog IUI प्रक्रिया क्या है? (IUI Process in Hindi) आज के समय में बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण कई दंपत्तियों को गर्भधारण में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने कई समाधान दिए हैं, जिनमें IUI (इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन) एक सरल और प्रभावी उपचार माना जाता है। यह प्रक्रिया उन दंपत्तियों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है, जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ हैं। इस लेख में हम IUI प्रक्रिया को विस्तार से समझेंगे, ताकि आप इसके हर पहलू से परिचित हो सकें। IUI प्रक्रिया का संक्षिप्त परिचय IUI एक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है जिसमें तैयार किए गए स्वस्थ शुक्राणुओं को सीधे महिला के गर्भाशय में डाला जाता है, ताकि निषेचन (fertilization) की संभावना बढ़ सके। यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल, कम खर्चीली और कम समय लेने वाली होती है, इसलिए इसे शुरुआती उपचार के रूप में सुझाया जाता है। IUI क्या होता है? IUI का पूरा नाम “Intrauterine Insemination” है। इसमें पुरुष के शुक्राणुओं को प्रोसेस करके सबसे सक्रिय और स्वस्थ स्पर्म को चुना जाता है और फिर उन्हें महिला के गर्भाशय में सही समय पर डाला जाता है। इसका उद्देश्य यह होता है कि स्पर्म को अंडे के जितना करीब पहुंचाया जा सके, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़े। IUI की परिभाषा IUI एक चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें लैब में तैयार किए गए स्पर्म को एक पतली ट्यूब (कैथेटर) की मदद से सीधे गर्भाशय में डाला जाता है, ताकि निषेचन की प्रक्रिया आसान और तेज हो सके। आज ही विशेषज्ञ से सलाह लें और अपनी स्थिति को समझें Book An Appointment यह कैसे काम करता है IUI प्रक्रिया महिला के ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्ग) के समय के आसपास की जाती है। डॉक्टर पहले यह सुनिश्चित करते हैं कि महिला के अंडाशय से अंडा निकल रहा है या नहीं। उसी समय पुरुष के स्पर्म को प्रोसेस करके उनमें से सबसे बेहतर स्पर्म को चुना जाता है। फिर इन्हें गर्भाशय में डाला जाता है, जिससे स्पर्म को अंडे तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है और गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। किन लोगों के लिए उपयोगी है IUI उन दंपत्तियों के लिए फायदेमंद होता है जिन्हें हल्की फर्टिलिटी समस्याएं होती हैं। जैसे कि पुरुष में स्पर्म की संख्या कम होना या उनकी गतिशीलता (motility) कम होना, महिला में ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या, सर्वाइकल म्यूकस में समस्या, या बिना किसी स्पष्ट कारण के बांझपन (unexplained infertility)। इसके अलावा, कुछ मामलों में यह सिंगल महिलाओं या डोनर स्पर्म की जरूरत वाले केस में भी उपयोगी होता है। IUI प्रक्रिया कैसे की जाती है? IUI प्रक्रिया आमतौर पर मासिक चक्र के अनुसार की जाती है। सबसे पहले डॉक्टर महिला को कुछ दवाएं देते हैं जिससे अंडाशय में अंडे बनने की प्रक्रिया को उत्तेजित किया जा सके। इसके बाद अल्ट्रासाउंड के जरिए अंडों की ग्रोथ पर नजर रखी जाती है। जब अंडा पूरी तरह विकसित हो जाता है, तब ओव्यूलेशन का सही समय निर्धारित किया जाता है। उसी दिन पुरुष से स्पर्म सैंपल लिया जाता है, जिसे लैब में प्रोसेस करके उसमें से अच्छे और सक्रिय स्पर्म अलग किए जाते हैं। इसके बाद एक पतली कैथेटर की मदद से इन स्पर्म को महिला के गर्भाशय में डाला जाता है। यह प्रक्रिया लगभग 10–15 मिनट में पूरी हो जाती है और आमतौर पर इसमें ज्यादा दर्द नहीं होता। IUI कब करवाना चाहिए? IUI तब करवाना चाहिए जब दंपत्ति लंबे समय से गर्भधारण की कोशिश कर रहे हों लेकिन सफलता नहीं मिल रही हो। अगर महिला की उम्र 35 साल से कम है और एक साल तक कोशिश करने के बाद भी प्रेग्नेंसी नहीं होती, तो डॉक्टर IUI की सलाह दे सकते हैं। वहीं, 35 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को 6 महीने कोशिश के बाद ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, अगर पुरुष में हल्की स्पर्म समस्या हो, महिला में ओव्यूलेशन अनियमित हो, या कोई स्पष्ट कारण न हो, तब भी IUI एक अच्छा विकल्प हो सकता है। IUI के फायदे IUI प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक सरल और कम इनवेसिव उपचार है। इसमें सर्जरी की जरूरत नहीं होती और यह अन्य फर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स की तुलना में कम खर्चीला होता है। इसके अलावा, यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाती है और मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं होती। जिन दंपत्तियों को हल्की फर्टिलिटी समस्या होती है, उनके लिए यह एक प्रभावी पहला कदम साबित हो सकता है। IUI के नुकसान और जोखिम हर चिकित्सा प्रक्रिया की तरह IUI के भी कुछ नुकसान और जोखिम हो सकते हैं। हालांकि ये आमतौर पर बहुत गंभीर नहीं होते, लेकिन इनके बारे में जानकारी होना जरूरी है। सफलता दर सीमित होना IUI की सफलता दर कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे महिला की उम्र, स्पर्म की गुणवत्ता और ओव्यूलेशन का सही समय। हर साइकिल में इसकी सफलता की संभावना सीमित होती है, इसलिए कई बार इसे एक से अधिक बार करना पड़ सकता है। मल्टीपल प्रेग्नेंसी का जोखिम IUI के दौरान दी जाने वाली दवाओं के कारण एक से अधिक अंडे विकसित हो सकते हैं, जिससे जुड़वा या उससे अधिक बच्चों की संभावना बढ़ जाती है। इसे मल्टीपल प्रेग्नेंसी कहा जाता है, जो कुछ मामलों में जोखिम भरा हो सकता है। हल्का संक्रमण या असुविधा IUI प्रक्रिया के दौरान कुछ महिलाओं को हल्का दर्द, ऐंठन या असुविधा महसूस हो सकती है। बहुत कम मामलों में संक्रमण का खतरा भी हो सकता है, लेकिन यह काफी दुर्लभ होता है। IUI की सफलता दर IUI की सफलता दर आमतौर पर 10% से 20% प्रति साइकिल के बीच होती है, लेकिन यह कई बातों पर निर्भर करती है। कम उम्र की महिलाओं में इसकी सफलता दर अधिक होती है, जबकि उम्र बढ़ने के साथ यह कम हो सकती है। इसके अलावा, अगर फर्टिलिटी समस्या हल्की है, तो सफलता की संभावना ज्यादा होती है। यह समझना जरूरी है कि IUI की सफलता केवल एक बार में सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि कई बार 2 से 3 साइकिल तक प्रयास करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार
Hormone Kya Hai? प्रकार, कार्य और संतुलन कैसे रखें

Blog हार्मोन क्या है? (Hormone Kya Hai) हार्मोन हमारे शरीर के अंदर काम करने वाले ऐसे अदृश्य लेकिन बेहद शक्तिशाली तत्व होते हैं, जो हमारे पूरे शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। ये छोटे-छोटे केमिकल मैसेंजर होते हैं जो शरीर के अलग-अलग अंगों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करते हैं। चाहे बात हो मूड की, ग्रोथ की, मेटाबॉलिज्म की या प्रजनन क्षमता की हर चीज कहीं न कहीं हार्मोन से जुड़ी होती है। अगर हार्मोन संतुलित रहें तो शरीर सही तरीके से काम करता है, लेकिन असंतुलन होने पर कई तरह की समस्याएं शुरू हो सकती हैं। परिचय मानव शरीर एक जटिल मशीन की तरह है, जहां हर एक प्रक्रिया आपस में जुड़ी होती है। इस पूरी प्रणाली को संतुलित बनाए रखने में हार्मोन का बहुत बड़ा योगदान होता है। हार्मोन शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम द्वारा बनाए जाते हैं और ये खून के जरिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचते हैं। इनका काम केवल शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करना ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखना भी होता है। आज के समय में खराब लाइफस्टाइल, तनाव और गलत खानपान के कारण हार्मोनल समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हार्मोन क्या होते हैं? हार्मोन ऐसे केमिकल पदार्थ होते हैं जो शरीर की ग्रंथियों (glands) द्वारा बनाए जाते हैं और रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचकर उन्हें निर्देश देते हैं। ये शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं जैसे कि विकास (growth), भूख, नींद, मूड, और प्रजनन। हार्मोन बहुत कम मात्रा में भी बहुत प्रभावशाली होते हैं और इनके बिना शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली संभव नहीं है। हार्मोन की परिभाषा सरल भाषा में कहा जाए तो हार्मोन वे रासायनिक संदेशवाहक हैं जो शरीर की ग्रंथियों द्वारा बनाए जाते हैं और रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक जाकर उन्हें निर्देश देते हैं कि उन्हें क्या और कैसे काम करना है। यह एक तरह का आंतरिक संचार तंत्र है, जो शरीर के हर हिस्से को आपस में जोड़कर रखता है। आज ही अपने हार्मोन टेस्ट और कंसल्टेशन बुक करें Book An Appointment हार्मोन का मुख्य कार्य हार्मोन का मुख्य कार्य शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित और संतुलित रखना है। ये शरीर की ग्रोथ और डेवलपमेंट को प्रभावित करते हैं, मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं, शरीर के तापमान को संतुलित रखते हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा हार्मोन हमारे मूड, नींद और ऊर्जा के स्तर को भी प्रभावित करते हैं। महिलाओं और पुरुषों में प्रजनन से जुड़ी प्रक्रियाएं भी हार्मोन के नियंत्रण में ही होती हैं। केमिकल मैसेंजर क्या होते हैं केमिकल मैसेंजर वे पदार्थ होते हैं जो शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जानकारी पहुंचाते हैं। हार्मोन इसी श्रेणी में आते हैं। जब शरीर को किसी विशेष कार्य को करने की जरूरत होती है, तो हार्मोन उस अंग तक संदेश पहुंचाते हैं और उसे सक्रिय करते हैं। उदाहरण के लिए, जब हमें भूख लगती है या नींद आती है, तो यह भी हार्मोन के कारण ही होता है। हार्मोन कैसे काम करते हैं? हार्मोन का काम करने का तरीका बहुत ही व्यवस्थित होता है। ये एंडोक्राइन ग्रंथियों से निकलकर खून में मिल जाते हैं और शरीर के उन हिस्सों तक पहुंचते हैं जहां उनकी जरूरत होती है। हर हार्मोन का एक विशेष लक्ष्य (target organ) होता है, जहां पहुंचकर वह अपना काम करता है। जब हार्मोन अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं, तो वे वहां की कोशिकाओं को संकेत देते हैं और शरीर की प्रक्रिया को शुरू या नियंत्रित करते हैं। यह पूरा सिस्टम बहुत सटीक तरीके से काम करता है, इसलिए थोड़ी सी गड़बड़ी भी पूरे शरीर पर असर डाल सकती है। हार्मोन के प्रकार हार्मोन को उनके निर्माण और कार्य के आधार पर अलग-अलग प्रकारों में बांटा गया है। मुख्य रूप से इन्हें तीन श्रेणियों में रखा जाता है:- पेप्टाइड हार्मोन, स्टेरॉयड हार्मोन और अमीनो एसिड से बने हार्मोन। हर प्रकार के हार्मोन का काम और प्रभाव अलग होता है, लेकिन सभी का उद्देश्य शरीर को संतुलित रखना ही होता है। पेप्टाइड हार्मोन पेप्टाइड हार्मोन प्रोटीन से बने होते हैं और ये शरीर में तेजी से काम करते हैं। ये आमतौर पर कोशिकाओं की सतह पर रिसेप्टर्स से जुड़ते हैं और तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। इंसुलिन इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। ये हार्मोन पानी में घुलनशील होते हैं और शरीर में जल्दी प्रभाव दिखाते हैं। स्टेरॉयड हार्मोन स्टेरॉयड हार्मोन वसा (fat) से बने होते हैं और ये कोशिकाओं के अंदर जाकर काम करते हैं। ये हार्मोन धीरे-धीरे लेकिन लंबे समय तक प्रभाव डालते हैं। जैसे कि टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन, जो प्रजनन और यौन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण बदलावों को नियंत्रित करते हैं। अमीनो एसिड से बने हार्मोन ये हार्मोन अमीनो एसिड से बनते हैं और इनका प्रभाव अलग-अलग तरह से हो सकता है। जैसे थायरॉइड हार्मोन, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है। ये हार्मोन शरीर की ऊर्जा और वजन को संतुलित रखने में मदद करते हैं। प्रमुख हार्मोन और उनके कार्य शरीर में कई प्रकार के हार्मोन होते हैं, और हर एक का अपना विशेष कार्य होता है। इंसुलिन ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है, थायरॉइड हार्मोन मेटाबॉलिज्म को संतुलित करता है, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं, जबकि टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में यौन विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा कोर्टिसोल तनाव को नियंत्रित करता है और मेलाटोनिन नींद को नियंत्रित करने में मदद करता है। हार्मोनल असंतुलन क्या है? जब शरीर में हार्मोन की मात्रा बहुत ज्यादा या बहुत कम हो जाती है, तो इसे हार्मोनल असंतुलन कहा जाता है। यह समस्या अस्थायी भी हो सकती है और लंबे समय तक भी बनी रह सकती है। हार्मोनल असंतुलन शरीर की कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है और इसके कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके कारण हार्मोनल असंतुलन के कई कारण हो सकते हैं। खराब लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान, ज्यादा तनाव, नींद की कमी, मोटापा और कुछ मेडिकल स्थितियां इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और